by Dr. Prakhar Dixit ✓ · 6 Aug 2018
तपै तवा सी यह धरा दिनकर उगलैं आग। छाँह दुपहरी ढूँढती ठंडाई केरी फाग।। ठंडाई केरी फाग कहाँ जा ढूढैं गगरी।
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