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Poem · Others

आत्मसम्मान-मेरा गौरव

by Dr. Foram Patel ✓ · 26 Apr 2020

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बनाना चाहती थी तुझे अपने सर का ताज़ पर अफ़सोस तू तो मेरे जूतों के भी लायक़ नहीं था।

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आत्मसम्मान-मेरा गौरव · StoryMirror