120Log inSign up
Poem · Fantasy

अग़र मैं खुदा होता

by Swechchha Tomar ✓ · 19 Aug 2018

27.6KReads
22Likes
2Min read

'कांपती पत्ती गुलाब की, यूँ अधरों को में रूप देता, फिर सिखा तुझे नाम अपना, तुझसे नया सा सुन लेता।' एक खुबसूरत कविता।

Loading comments…

अग़र मैं खुदा होता · StoryMirror