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#alonelife
1751 poems
उड़ान
Tanmay Binjrajka · 1 min read · 14.1K reads
खुद को पहचानने का नाम ही ज़िंदगी है!
Fantasy
अन्जान हूँ
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7.2K reads
आँखे निस्तेज डरी हुई सी भय थिरकन से भरी हुई सी खतरा हर पल लगा हुआ सा गले में अटकी जान हूँ।
Drama
सत्य हूं मैं
Kavi Suneel Kumar · 1 min read · 22.2K reads
सत्य हूं मैं, बिक चुका हूं झूठ के बाज़ार में । मैं अकेला चल रहा हूं...
Drama
कुछ भी ना था
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7.1K reads
मेरे साथ कुछ भी न था जो देखा पीछे मुड़के।
Drama
मैं तन्हा हूँ
Pratima Pritu · 1 min read · 1.6K reads
मैं ही यहाँ-वहाँ हूँ, हाँ मैं तन्हा हूँ...!
Drama
इन्सान
Amol Nanekar · 1 min read · 7.1K reads
ना घर, ना घरवाले बस कागज़ के नोटों से रौशन हूँ मैं...!
Drama
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