by Rinku Bajaj ✓ · 18 Jul 2019
तन्हाई सता रही है मुझको अकेलापन खा गया है मुझको जब भी मैने हँसना चाहा ग़मों ने गले लगाया मुझको ज़िन्दगी कोई सज़ा नहीं है कोई भी ग़लती गुनाह नहीं है
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