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#anupam
9 poems
सन्नाटे की गूँज
Anupam Tripathi · 3 min read · 13.2K reads
(हर पति की ओर से अपनी पत्नी के प्रति शाश्वत भावना एवं हर पत्नी की अपने पति के प्रति सारस्वत भावना को समर्पित हास्य रचना )
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मृत्यु गीत :: अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे
Anupam Tripathi · 2 min read · 18.6K reads
एक अघोरी अपनी शव-साधना के लिये चिता पर रखे शव को प्राप्त करने की प्रतीक्षा में है, अघोरी और शव के बीच एक मौन–संवाद और अंतर्द्वंद्व को रेखांकित करती, झझकोर देने वाली एक कविता
Abstract
"माँ ! कहाँ सोती है....."
Anupam Tripathi · 1 min read · 13.5K reads
मातृ--दिवस पर समर्पित एक भाव-प्रवण कविता , जो आपके अंतरमन को गहरे तक झझकोर देने का माद्दा रखती है
Fantasy
माँ ! सपने पकाती है ; उम्मीद की आँच पर
Anupam Tripathi · 1 min read · 20.5K reads
कल ; बड़े होंगे : बच्चेमाँ की उम्मीदें -- माँ के सपने
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" बापू -- बकरी और बंदर "
Anupam Tripathi · 4 min read · 1.8K reads
क्लासिक व्यंग्य/ वर्तमान भारत की तथा-कथा. आजादी के पहले और आजादी के बाद महात्मा गाँधी के योगदान को विस्मृत करना हमारी अक्षम्य भूल होगी ।बापू ! हमारे उत्सर्ग और संघर्ष की कहानी हैं ; इसीलिए तो वे राष्ट्रपिता कहलाये। "बुरा मत कहो--बुरा मत सुनो--बुरा मत देखो"
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इस दौर का चेहरा
Anupam Tripathi · 1 min read · 6.9K reads
ये एक गजल है , जन और तंत्र के बीच का अंतर्द्वंद्व दिखाती .
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