by Nitesh Kamboj ✓ · 31 Aug 2017
ये कविता उन सब लोगों को समर्पित है जो अपंग होते भी ज़िन्दगी से हार नहीं मानते, डटे रहते हैं, ज़िन्दगी जीते भी हैं और ज़िन्दगी से भी जीतते हैं । तभी तो अपराजित कहलाते हैं ।
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