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#jeet
3 poems
खबर ही नहीं
Nikhil Sharma · 1 min read · 7.3K reads
अपनी जीत और अपनी हार की अपने जश्न, अपने त्यौहार की इस युग की, इस संसार की
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देख लूँ!
Anita Sharma · 1 min read · 265 reads
ज़रा मैं ज़िंदादिली से आगे बढ़कर देख लूँ।
Inspirational
अपराजित
Nitesh Kamboj · 2 min read · 22.8K reads
ये कविता उन सब लोगों को समर्पित है जो अपंग होते भी ज़िन्दगी से हार नहीं मानते, डटे रहते हैं, ज़िन्दगी जीते भी हैं और ज़िन्दगी से भी जीतते हैं । तभी तो अपराजित कहलाते हैं ।
Inspirational