by Kavi Vijay Kumar Vidrohi ✓ · 1 Sept 2017
संविधान का जर्जर तन मैं अंधों को दिखलाता हूँ । बहरों की बस्ती में पीड़ा लोकतंत्र की गाता हूँ । -राष्ट्रवादी कवि विजय कुमार विद्रोही
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