by Vivek Mishra ✓ · 14 Feb 2019
जहाँ पाँव रखूँगा तो जा गिरूँगा ओंधे मुंह और मेरे ख़्वाब चाकनाचुर हो ज़ायेंगे जैसे कर दिये थे तुमने पिछली दफ़ा
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