by Pankaj Priyam ✓ · 8 Jul 2019
घटा सावन घनेरी है, .......अँधेरी रात कजरारी चमक बिजुरी कटारी ने, जिया में घात है मारी। विरह की आग में जलती, तपन की रात ना ढलती- कटे कैसे अकेले में,........भरी बरसात ये सारी।।
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