by Dr. Prakhar Dixit ✓ · 31 Jul 2018
स्पंदन श्वाँसों का तुम ही मेरे जीवन की प्रत्याशा हो। रसिया छलिया लिलहारी सखा तुम ग्वालिन गोप की आशा हो।।
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