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#Hindu
16 poems
छवि चिंतन
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 1.4K reads
स्पंदन श्वाँसों का तुम ही मेरे जीवन की प्रत्याशा हो। रसिया छलिया लिलहारी सखा तुम ग्वालिन गोप की आशा हो।।
Drama
तेरी जय हो
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7K reads
मनवांछित फल देने वाली समाहित अन्दर करने वाली रूप करोड़ों बदलने वाली हे सतरूपा, हे महामाया तेरी जय हो, तेरी जय हो।
Drama
सुप्रभातम्
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 1.4K reads
कान्हाँ तेरी बाँसुरी रह रह कैं अचकाय। विपिन बजै श्रवनन परै रग रग मद लहराय।।
Drama
पद
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 1.3K reads
राम जी ! आवहु फिर इक बार। मात पिता कौं कंस त्रास दैं पीर को नहि उपचार।
Drama
हे री ! मन बिसरत नहिं बनवारी
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 230 reads
हे री ! मन बिसरत नहिं बनवारी। जब तैं श्याम सिधारे मथुरा सुध तन मन सखी बिसारी।
Drama
जय माँ शारदे
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 2.5K reads
अर्पित भाव करौं हे महमायी। कृपा करौ जय शुभ फलदायी।।
Drama
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