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Poem · Inspirational

चिन्तन

by Shakuntla Agarwal ✓ · 8 Feb 2019

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आम था , आम हूँ , आम रह गया इस राह में ! भविष्य जब आता है , आँखें नहीं मिला पाता हूँ ! टूटता जब तिलस्म तो , सच से भय खाता

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चिन्तन · StoryMirror