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2 poems
डुंगरपुर का परिचय
Vikas Sharma · 2 min read · 6.8K reads
विकास के मानकों को तय करने वालों ने जिन आधारों को चुना है... क्या वे सही अर्थो में विकास को समझ रहे होते हैं... चकाचौंध से परे, मुखौटें के पीछे की सच्चाई-सुंदरता की परिभाषा हो सकती है क्या? छोटे शहर की कहानी कहती यह कविता ऐसे ही तमाम प्रश्न बुनती चली जायगी, डुंगरपुर के चित्र को आपके मानस में उतारने के प्रयास के साथ विकास के मानको को भी पुन: सोचने को उद्देलित करेगी।
Abstract
पतझड़ सावन बसंत बाहर
Ananya Singhal · 1 min read · 546 reads
कहने को ये सब है पाँच हरदम चलते हमारे साथ।
Abstract