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#firse
4 poems
फिर से
Navneet Pandey · 1 min read · 13.9K reads
मेरा आज फिर मेरे कल से मिलने चला है! फिर से यादों का एक कारवाँ सा बनता जा रहा है! क्या खोकर क्या पाया है इसकी समीक्षा तो नामुमकिन ही है लेकिन बयां करने में ही हँसने रोने का एक क्रम लगातार जारी है! शायद यही जीवन है खट्टी मीठी यादों से भरा एक सफर, जो फिर शब्दों को सारथी बनाकर अनवरत गतिमान हो रहा है...
Inspirational
हद से गुज़र के.
Nitin Kumar · 1 min read · 7K reads
हद से गुज़र केदेखो कभीमोहब्बत कर के देखो कभी
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शास्त्री गांधी से सीख लो
Shyam Kunvar Bharti · 1 min read · 237 reads
लड़ा जाता कैसे जंगे आजादी गांधी से सीख लो सत्य अहिंसा की कैसी आजादी गांधी से सीख लो!
Inspirational
उजालों भरी सुबह
Rachana Sharma · 1 min read · 7.5K reads
कभी इस घर में भी हुआ करती थी उजालों भरी सुबह
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