
मेरा आज फिर मेरे कल से मिलने चला है! फिर से यादों का एक कारवाँ सा बनता जा रहा है! क्या खोकर क्या पाया है इसकी समीक्षा तो नामुमकिन ही है लेकिन बयां करने में ही हँसने रोने का एक क्रम लगातार जारी है! शायद यही जीवन है खट्टी मीठी यादों से भरा एक सफर, जो फिर शब्दों को सारथी बनाकर अनवरत गतिमान हो रहा है...
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