by Alok Yadav ✓ · 17 Apr 2018
क़र्ज़ क्या लाया मैं खुशियाँ ज़िन्दगी से एक दिन रोज़ करती है तक़ाज़ा और झुँझलाता हूँ मैं, हौसला तो देखिये मेरा ग़ज़ल की खोज में
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