Story
Mirror
Home
Stories
Poems
Quotes
Series
Library
Write
English
हिन्दी
বাংলা
ગુજરાતી
मराठी
ଓଡ଼ିଆ
தமிழ்
తెలుగు
ಕನ್ನಡ
മലയാളം
120
Log in
Sign up
Loading…
StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat
#ishwar
2 poems
ईश्वर है, ईश्वर नहीं है
Neeraj Kumar · 1 min read · 7K reads
ईश्वर है या ईश्वर नहीं है ?
Others
हे ईश्वर, तेरा घोंसला है टूट रहा
Sreenesh Ramesh Bindu Kini · 1 min read · 7K reads
यह कविता इंसान के आज की परिस्तिथि को दर्शाती है। इंसान आज बस दौड़ लगाए जा रहा है। पैसे कमाने की दौड़, जीतने की दौड़ आदि। स्वार्थ ही जैसे रोम-रोम में बस चुका है और खुदगर्ज़ी आज सबसे ऊपर है। क्या बताऊं तुझे ईश्वर, तेरा बनाया घोंसला है टूट रहा।
Abstract