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Poem · Abstract

जादू की दुनिया

by हरि शंकर गोयल "श्री हरि" ✓ · 29 Dec 2025

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यह जादू की दुनिया है, जहाँ धड़कनें मोती-सी गिरती हैं, जहाँ पलकें बंद होते ही, दिशाएँ सपनों से मिलती हैं। यहाँ चाँद दरीचा खोलकर, तारों की चूड़ियाँ पहनाता, फुसफुसा कर रात के आँचल में, चाँदी-सा उजाला बिखराता।

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