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#jivanmanzil
19 poems
मंज़िल की ओर
Anupama Gupta · 1 min read · 6.9K reads
संघर्षों का झंझावात,वीरान कर देता जीवन।हिला देता है,विश्वास की जड़ों को।झकझोर देता है
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मानव जीवन एक प्रश्न चिह्न
Saroj Tiwari · 1 min read · 13.3K reads
जीवन मानव का क्यों ??? प्रश्न चिह्न है बना हुआ जीने के ढंग हैं पृथक पृथक फिर भी जीवन में उथल पुथल कहीं शून्य कहीं मरघट सा विरान चमन श्मशान सा सन्नाटा ख़ुशियों और रिश्तों का जीवन से टूट गया नाता इस पर भी हम कहते हैं कि ज़िंदा हैं किस अर्थ में ? जीवन को करते हम शर्मिन्दा हैं जीवन के उलझन का क्या कोई अंत नहीं प्रेम का इस जीवन क्या कोई अर्थ नहीं क्या जीवन का उत्थान पतन बस यहीं और यही है ?????
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मंज़िल
sunil kumar panda · 1 min read · 860 reads
अंजानी राहों पर निकल पड़ो नई राह अगर दिखाना है
Inspirational
‘भ्रम भंग’
Indu Singh · 1 min read · 20.2K reads
जब आया साँसों का अंत डूबने लगा जीवन सूर्य तब ये राज़ समझ आया कि जिसे समझते रहे वजूद अपना वो तो बस, कद से बड़ा देह का साया था ।
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औरत जब टूट जाती है तब भी रचती है कविता
Naayika Naayika · 1 min read · 7.2K reads
नदियों का अपना कोई वज़ूद नहीं होता वो या तो प्यास बुझाती हैं या पाप धोती हैं......
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प्रेम का भूगोल : ऊष्ण कटिबंध
Naayika Naayika · 1 min read · 13.8K reads
मैंने देह की माटी पर प्रेम के बीज बोऐ हैं तुम अपनी प्रकाश किरणों से उसे संश्लेषित कर जाओ....
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