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Poem · Abstract

जुगनुओं को रोशनी...

by Vivek Vistar ✓ · 13 Dec 2021

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इस ज़माने से मिरे रिश्ते अलग हैं थोड़े से लोग देते हैं दगा तो मुस्कुरा देता हूं मैं।

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