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#vivekvistar
3 poems
इस दौर में
Vivek Vistar · 1 min read · 134 reads
आपके दौर में सो गया है खुदा या किसी और को रब बनाया गया।
Abstract
जुगनुओं को रोशनी...
Vivek Vistar · 1 min read · 482 reads
इस ज़माने से मिरे रिश्ते अलग हैं थोड़े से लोग देते हैं दगा तो मुस्कुरा देता हूं मैं।
Abstract
जागृति गान
Vivek Tariyal · 1 min read · 820 reads
आज देश अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है इस कविता के माध्यम से कवि उन युवाओं से निंद्रा तोड़ने का आह्वाहन करता है ।
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