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Poem · Others

"ख"

by Nikhil Sharma ✓ · 24 Mar 2017

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"ख" से ही बनी वो "खंजर" जो पीठ में घोंपे जाते हैं ||"ख" से ही होती हैं वो "ख़ुशियाँ" जिन्हें पाने को मेहनतकश कुछ भी कर जाते हैं ||

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