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#khabar
2 poems
खबर ही नहीं ...
Nikhil Sharma · 1 min read · 6.7K reads
जाने कैसे किसी के इतना करीब गया जो शीशे की तरह मैं टूट गया दूसरों को खुद में झाँकने का पूरा मौका दिया और खुद के हाल की खबर ही नहीं ...
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खबर ही नहीं
Nikhil Sharma · 1 min read · 7.3K reads
अपनी जीत और अपनी हार की अपने जश्न, अपने त्यौहार की इस युग की, इस संसार की
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