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Poem · Others

ख़त से उम्र क़ैद तक

by Shashank Shukla ✓ · 28 Feb 2017

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तमाम ख़त जो उसने कभी मुझे लिखे वो कोरे के कोरे ही रहते थे..

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ख़त से उम्र क़ैद तक · StoryMirror