by Negi India ✓ · 16 Jul 2017
सैलाब-ए-मंज़र तब भी, आज भी-2तू आंसुओं का रुकना तो न बदल सका ए दोस्त,फरिश्ता-ए-ख़ुशी तूने कारण ज़रूर बदल दिये।
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