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Poem · Inspirational

कविता: संबोधन

by Naayika Naayika ✓ · 1 Sept 2017

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बातें भी ऐसी ही होती हैंसंबोधन रहित,उसे पकड़ कर पिंजरे में नहीं डालना होता है,उसे मुट्ठी में भींच कर आसमान में उछालोकिसी बादल के फट जाने तक,तब बरसेंगी बातें और जिसको जैसे भीगना होगा भीग जाएगा।

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