Story
Mirror
Home
Stories
Poems
Quotes
Series
Library
Write
English
हिन्दी
বাংলা
ગુજરાતી
मराठी
ଓଡ଼ିଆ
தமிழ்
తెలుగు
ಕನ್ನಡ
മലയാളം
120
Log in
Sign up
#man
21 poems
अन्जान हूँ
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7.2K reads
आँखे निस्तेज डरी हुई सी भय थिरकन से भरी हुई सी खतरा हर पल लगा हुआ सा गले में अटकी जान हूँ।
Drama
अनप्लग्ड पोएट्री
Aditya Mehta · 2 min read · 7.1K reads
उन सारे अधूरे सवालों का ज़िक्र मेरे ख़्वाबों में कर जाया करती है...
Drama
मेरे कुछ अल्फाज़
Kavi Diptesh Tiwari · 1 min read · 7K reads
कौन कहता है कि वक्त फिसलता नही हाथो से ? जान लोगे तुम भी रेत को मुट्ठी में लेने के बाद !
Drama
इन्सान
Amol Nanekar · 1 min read · 7.1K reads
ना घर, ना घरवाले बस कागज़ के नोटों से रौशन हूँ मैं...!
Drama
गरीब की बेटी
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 2K reads
धन के भक्षी लोभी भेडि़ये से तंग आकर वह जल मरी श्मशान पहुंचने से पहले ही चिता बन घर में जल जाती है।
Crime
आदमी का आदमी होना बड़ा दुश्वार है
AJAY AMITABH SUMAN · 1 min read · 306 reads
रोज उठकर सबेरे पेट के जुगाड़ में, क्या न क्या करता रहा है आदमी बाजार में।
Tragedy
Loading…
Next page →