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#manzil
4 poems
मंज़िल की ओर
Anupama Gupta · 1 min read · 6.9K reads
संघर्षों का झंझावात,वीरान कर देता जीवन।हिला देता है,विश्वास की जड़ों को।झकझोर देता है
Others
मंज़िल
sunil kumar panda · 1 min read · 860 reads
अंजानी राहों पर निकल पड़ो नई राह अगर दिखाना है
Inspirational
मंज़िल और सुकून की तलाश
Sonal Gour · 2 min read · 308 reads
शायद ख़्वाबों के संग अपने सुकून से भी मुलाक़ात कर पाओ !
Inspirational
हे ईश्वर, तेरा घोंसला है टूट रहा
Sreenesh Ramesh Bindu Kini · 1 min read · 7K reads
यह कविता इंसान के आज की परिस्तिथि को दर्शाती है। इंसान आज बस दौड़ लगाए जा रहा है। पैसे कमाने की दौड़, जीतने की दौड़ आदि। स्वार्थ ही जैसे रोम-रोम में बस चुका है और खुदगर्ज़ी आज सबसे ऊपर है। क्या बताऊं तुझे ईश्वर, तेरा बनाया घोंसला है टूट रहा।
Abstract