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Poem · Drama

मेरी मेज़

by Shashi Kant Singh ✓ · 3 Aug 2018

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दिन बीतते गये मेज पर मेरे, कैलेंडर के पन्ने नए होते गये हर रोज बिखरते नये कागजों की धूल मेरे इरादों की ज़मी पर परत दर परत

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मेरी मेज़ · StoryMirror