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Poem · Drama

नदी की आत्मकथा

by Anand Kumar Jha ✓ · 14 Jul 2018

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हिमगिरि से निकल कर कल-कल, निरंतर प्रवाहमान करती छल- छल, है मेरी जलधारा निर्मल, पर्वत श्रृंखला माता पिता मेरे चंचल !

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