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Poem · Others

परिन्दा

by Rahul Dogra ✓ · 29 Jun 2017

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  पानी की धार में पर कट गऐ  सूरज की गर्मी से हौसले जल गऐ।  आज वो परिन्दा पिँजरे में है  आज भी आशियाँ की खोज में है।    

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