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Poem · Drama

प्रकृति और अन्धेरा

by नवल पाल प्रभाकर दिनकर ✓ · 13 Aug 2018

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देखते आसमान के तारों को मन में नही होता उनके चैन गौधूली के समय से ही लगे हैं खेलने अपना खेल ।

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प्रकृति और अन्धेरा · StoryMirror