StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat- उच्च वर्गनवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7.5K readsउच्च अट्टालिकाओं पर बैठे
तुच्छ तुम्हारी औकात है क्या।Drama
- ख़ुशीSourabh Pathak · 2 min read · 13.3K readsहमको मखमल भी गड़ता है, वो पत्थर पे सो जाते हैं, ये लोग कहाँ से आते हैं ?Drama

मैं अपना देख़ूँ , कि तुम्हाराRavikant Raut · 1 min read · 20.6K readsमैं अपना देखूँ, कि तुम्हारा
प्रस्तावना :
देखा है किसी और देश में धन की पूजा होते ,भारत में होती है । जब धन वन्दनीय है , तो धनी निन्दनीय क्यों । अगर यहाँ सब ग़रीब ही रहें तो ये सम्पन्न अपने लिऐ ज़मीन कहाँ तलाशें । दु:ख़ से छुटकारा जब सुख़ ही है , तो सुखी से नफ़रत क्यों । अमीरों के भी अपने दु:ख़ और दर्द होते हैं , वे थोड़े अलग होते हैं बस । आम आदमी उन्हें कभी जान नहीं पाता ,क्या सिर्फ़ इसीलिऐ उन्हें धिक्कारा जाये । साम्यवाद हो कि , समाजवाद दोनों ही अपने देश के सर्वहारा को समर्थ और संपन्न बनाने का सपना बेचकर ही पल्लवित होते हैं । फिर पूर्व- संपन्नों से द्वेष क्यूँ ।कब तक हम बड़ा करते रहेंगे अपने बच्चों को वही कहानियाँ सुना-सुना कर , एक मेहनतकश , दयालु,ईमानदार किसान था और एक दुष्ट अत्याचारी राजा था । क्यों दया का , ईमानदारी का ठेका क्या सिर्फ़ ग़रीबों ने ही ले रखा है , कोई धनवान दयालु और सहृदयी नहीं हो सकता । शैतान का वज़ूद माने बिना , ईश्वर के होने का कोई औचित्य नहीं ।
मेरी ये रचना , स्थापित मान्यताओं से अलग, प्रति-संकेतों के साथ एक विरोधाभाषी शैली (कोंट्रा-लुक) में लिखी गई है ।
Others- दिवालीRashmi Singh · 1 min read · 261 readsएक छोटा सा दीया कितनी रौशनी कर देता है !Inspirational
- चाँद और पानी की खोजsatender tiwari · 1 min read · 1.2K readsइतना समझाकर चाँद उस दिन वापिस लौट गया।।Inspirational
- धन के अपनेChandresh Kumar Chhatlani · 1 min read · 295 readsहोती है पूजा धनी व्यक्ति की.
लिखा जाता है इतिहास उन्हीं के नाम का।Tragedy