by Anita Jain ✓ · 15 Jul 2017
वान बना ये मानव देखो कामान्ध हो बन बैठा सर्प विशैला दंष दिया डस लिया नारी देह को समझ खिलौना खेला जी भर और तोड़ दिया मरने को छोड दिया जब-तब किया वार अस्मत पे उसकी
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