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#socialcriticism
36 poems
मैं एक तवायफ
Anuj Kumar · 2 min read · 14K reads
छूट चुकी हूँ मैं ख़ुद से। छोड़ दिया है ख़ुद को, कहीं किसी बिस्तर पर। बस पाया है अब अपने जिस्म को किसी मर्द की बाहों में या सीने पर।
Others
क्या थी मैं और क्या हो रही हूँ
Riya Jain · 2 min read · 67 reads
चलों मान लेती हूँ मेरी ही स्कर्ट छोटी थी पर तुम्हारी नीयत का क्या?
Tragedy
लक्ष्मी बाई
Dikshita Sharma · 1 min read · 50 reads
लक्ष्मी बाई’आज से शुरू इसके अस्तित्व की लड़ाई।
Tragedy
राखी और समाज
Himanshu Sharma · 1 min read · 40 reads
स्त्री हो किसी रूप में, बिना इनके आदमजात सूना है!
Inspirational
मैं कमजोर नही
Sonia Chetan kanoongo · 1 min read · 24.2K reads
एक औरत ही औरत की दुश्मन बन जाती है!
Tragedy
एक व्हेशी की सज़ा मुकम्मल
Anand Prakash Jain · 1 min read · 356 reads
समय सज़ा मुकम्मल कर जाता है, कोई मनचला महबूब उसे मंडप से ही उड़ा ले जाता है।
Tragedy
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