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#swarth
4 poems
विजयरथ
Nikhil Sharma · 1 min read · 7K reads
विजयतिलक उसी का है, जो बढे स्वार्थ त्याग कर ||अंतर्मन में जो तू ज्ञानदीप जगा सके |प्रकाश मन में वो करे, जो मन तमस हटा सके ||वो महानता किस काम की, जो पौरुष न दिखा सके |वो शक्ति भी व्यर्थ है, सहस जो न जुटा सके ||
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निस्वार्थ भावना से
D.J Tech · 1 min read · 176 reads
चांद सितारों से रोशन है ,यह जग सारा! घर किसी का हो अंधेरा, तो फिर रोशनी बेकार है!!!
Inspirational
स्वार्थ
Swapnil Jha · 1 min read · 6.9K reads
अच्छाई इसमें कुछ नहीं यूँ फँस के रोओगे छोड़ो इसे अब भी सही , क्यों स्वार्थ चुनते हो ?.......
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वो सच्चा फरेबी
Chandni Purohit · 1 min read · 232 reads
ख़ुद को ख़ुद से वो रूबरू करा कर गया रूह से वो मुकम्मल रिश्ता बना कर गया ।
Abstract