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#vijay
6 poems
सहिष्णुता
Kavi Vijay Kumar Vidrohi · 1 min read · 20.8K reads
यही फलन है जब नवपीढ़ी आँसू से सन जाती है सहिष्णुता जब हद से बढ़ती कायरता बन जाती है -राष्ट्रवादी कवि विजय कुमार विद्रोही
Inspirational
कविमति
Kavi Vijay Kumar Vidrohi · 1 min read · 20.7K reads
तब तब मेरी कलमें आँसू को स्याही कर देती हैं...............
Others
सिपाही
Ashok Patel · 1 min read · 13.9K reads
अगर गंगा, जमुना, सरस्वती, हैं ये अनमोल पवित्र जलधाराएँ, बहता लहू मेरे सिपाही का, है आग की धधकतीं ज्वालाएँ ।
Drama
काव्याग्नि
Kavi Vijay Kumar Vidrohi · 1 min read · 20.4K reads
तांडवजन्मा प्रलयअंश हूँ केवल रचनाकार नहीं , देशद्रोह के निजपुत्रों का कर सकता सत्कार नहीं .............. -विद्रोही
Others
श्री रामधारी सिंह दिनकर (श्रृद्धांजलि)
Kavi Vijay Kumar Vidrohi · 1 min read · 14.1K reads
बिहार चुनाव के कीड़ों की भूख इतनी बढ़ चुकी थी,जातिवाद की फसल इतनी विकसित हो चुकी कि, अब कवियों की जाति तक का पता लगाना इनका कार्य रह गया है । समाचार के अनुसार राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जाति जानने की अभिलाषा भी राजनीति का हिस्सा बना बैठे हैं । अब लगता है साहित्य जगत जो अभी तक आरक्षण से अछूता था ...वह भी । एक छोटी सी रचना निवेदन कर रहा हूँ । पूर्ण समर्थन का आशार्थी - विद्रोही
Others
देख लूँ!
Anita Sharma · 1 min read · 265 reads
ज़रा मैं ज़िंदादिली से आगे बढ़कर देख लूँ।
Inspirational