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#vivekvistarstorymirror
109 poems
इस दौर में
Vivek Vistar · 1 min read · 134 reads
आपके दौर में सो गया है खुदा या किसी और को रब बनाया गया।
Abstract
जुगनुओं को रोशनी...
Vivek Vistar · 1 min read · 482 reads
इस ज़माने से मिरे रिश्ते अलग हैं थोड़े से लोग देते हैं दगा तो मुस्कुरा देता हूं मैं।
Abstract
जागृति गान
Vivek Tariyal · 1 min read · 820 reads
आज देश अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है इस कविता के माध्यम से कवि उन युवाओं से निंद्रा तोड़ने का आह्वाहन करता है ।
Others
पालघर कांड
बिमल तिवारी "आत्मबोध" · 1 min read · 3.2K reads
क़बातलक चुपचाप सब बैठे रहोगे हाथ पर यूँ हाथ धर तकते रहोगे
Tragedy
बारिश
PIYUSH NAVEEN BAID · 2 min read · 206 reads
छाये काली काली बादल हर जगा घनघोर घाटा हर जगा।
Others
दिल ए आवाज
Ashish Yadav · 1 min read · 268 reads
कविता नहीं दिल ए आवाज लिख रहा हूं, तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहा हूं।
Romance
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