120Log inSign up
Poem · Others

व्यथा, अन्धकार की

by Tribhawan Kaul ✓ · 16 Aug 2017

26.8KReads
11Likes
1Min read

रात्रि का अन्धकार मूक, बधिर, उपेक्षित जीवन के आधारभूत मुल्यों को टटोलता इंसानो के अंतर्मन को समझने के कोशिश करता

Loading comments…

व्यथा, अन्धकार की · StoryMirror