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#दौड़
13 storys
मारीचिका
Ashish Kumar Trivedi · 1 min read · 629 reads
पर धीरे धीरे वह इस दलदल में धंसता गया। अब तो वह पूर्णतया इन लोगों के हाथ की कठपुतली बन चुका था।
Tragedy
बोझ
Vijay Vibhor · 1 min read · 397 reads
भीमानंद ने अनुभव किया की उनकी पोती की स्कूल की सिलेबस वाली किताबें हर रूप में अत्यधिक भारी थी। उन्हें महसूस हुआ आज के बचपन का बोझ उसके बुढ़ापे के बोझ से बहुत ज़्यादा है।
Others
"भई वाह! रेस।" एक गलतफहमी
CHARWAK GAUTAM · 5 min read · 786 reads
उन दो लड़कों को ग़लतफ़हमी हो गयी के मैं उस लड़की के साथ रेस कर रहा हूँ
Others
प्रतिस्पर्धा की दौड़
Rashi Singh · 1 min read · 7.7K reads
घर का इकलौता चिराग, माँ की आँखों का तारा, दादी-दादा का दुलारा आज प्रतिस्पर्धा की भेंट जो चढ गया था........
Drama
विकास
ARUN DHARMAWAT · 2 min read · 292 reads
"हुआ यूं कि विजय बाबू रोज की तरह ऑफिस को निकले, ऑफिस भी तो 30 किलोमीटर दूर है, तो क्या हुआ कि बाइक चलाते चलाते चक्कर आ गया। .
Tragedy
आधुनिकता की दौड़
Mens HUB · 2 min read · 274 reads
बदलाव समय के साथ आता ही है इसे रोका नहीं जा सकता।
Others
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