by Vijay Vibhor ✓ · 8 Aug 2019
भीमानंद ने अनुभव किया की उनकी पोती की स्कूल की सिलेबस वाली किताबें हर रूप में अत्यधिक भारी थी। उन्हें महसूस हुआ आज के बचपन का बोझ उसके बुढ़ापे के बोझ से बहुत ज़्यादा है।
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