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StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat
#धूप
43 storys
दिसंबर
Meera Srivastava · 3 min read · 13.9K reads
बोरसी और दिसंबर के दिन खासकर रातों की तो दोस्ती दाँत कटी रोटी जैसी
Inspirational
हिम स्पर्श - 05
Vrajesh Dave · 5 min read · 567 reads
मरुस्थल का उत्सव चार दिन पहले ही पूरा हो गया। इस नगर को छोड़कर यात्री जा चुके है। यह तो अस्थाई नगर है।
Others
टुकड़े-टुकड़े धूप
Manish Vaidya · 13 min read · 7.8K reads
धूप के टुकड़े लगातार अपनी जगह बदलते रहते। कभी रोटी की तरह थाली में नजर आते लेकिन थोड़ी ही देर में थाली से छिटक जाते। भूख बाकी रह जाती पर धूप के टुकड़े थाली से बाहर हो चुके होते। माँ के साथ अक्सर ही ऐसा होता। सबको खिलाने के बाद जब वह अपनी थाली परोसती तो जल्दी ही धूप का टुकड़ा थाली से छिटककर खाली परात में दौड़ने लगता जहाँ अब रोटियां नहीं, पपड़ाये हुए आटे की परत चिपकी रहती।
Drama
जीवनसंगिनी
Saroj Prajapati · 2 min read · 448 reads
ठंडी हो चुकी कॉफी को प्यार से देखती हुई उसे गर्म करने के लिए वह अंदर चल दी।
Drama
एक पति का प्रायश्चित
Manjula Dusi · 4 min read · 582 reads
अर्पिता की आँखों में जो खुशी की चमक आई,उसे शब्दों में बयान करना मुमकिन नहीं।
Inspirational
झगड़ा
Ravi Ranjan Goswami · 4 min read · 553 reads
अपने छोटे भाई जैसे देवर से वो बात करने के लिये आज़ाद न थी।
Drama
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