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#bus
3 storys
दास्तान-ए- सीट
Neha Tiwari · 6 min read · 14.5K reads
उनके पास एक आदमी मुह पर रुमाल बाँध कर आँखे बंद कर बैठा था। जब से मैं बस में चढ़ी थी। वो तब से ऐसे ही था।पहले सीट दूर थी, अब, जब पास बैठने का सौभाग्य मिला तब समझ आया भाई साहब पौवा लगा के बैठे हैं।टीचर जी ने शिकायत लगा दी कंडक्टर को।
Abstract
वह कौन थी ?
Braj Mohan Sharma · 2 min read · 15K reads
बस में हुई एक अनजान लड़की से मुलाकात कैसे बनी ज़िंदगी भर के लिए यादगार ? आइए पढ़ते हैं इस कहानी में...।
Drama
बेबाक
Shailaja Bhattad · 1 min read · 152 reads
वह खड़ी हो गई और ऊँची आवाज में बोली "अंकल आप अपना सिगार बुझाइये।
Children Stories