
अम्मा घबराती भी क्यों न, अरे इसी सियासत ने तो उनके एक भाई की पार्टीशन के समय जान ले ली थी। ‘‘ जानती हो पिछले माह जब मैं घर गया तो वहां देखा कि हमारे घर की चारदीवारी पर स्वास्तिक का निशान बनाया गया है। बाबरी मस्जिद के बाद उन लोगों का मन बढ़ गया है। मैंने जब अब्बा से इस बारे में बात की तो वह जोर से हंसे और कहे कि ये सब लड़कों की "शैतानी है। ऐसी-वैसी कोई बात नहीं। अब तुम्हीं बताओ कि मैं चिन्ता क्यों न करूं ?’’ ‘‘अब्बा तो हंसते-हंसते ये भी बताए कि जब ‘एंथ्रेक्स’ का हल्ला मचा था तब चंद स्कूली बच्चों ने चाक मिट्टी को लिफाफे में भरकर प्रिंसीपल के पास भेज दिया था। बड़ा बावेला मचा था। अब्बा हर बात को ‘नार्मल’ समझते हैं।’’
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