- गहरी जड़ें Anwar Suhail · 11 min read · 14.4K readsअम्मा घबराती भी क्यों न, अरे इसी सियासत ने तो उनके एक भाई की पार्टीशन के समय जान ले ली थी।
‘‘ जानती हो पिछले माह जब मैं घर गया तो वहां देखा कि हमारे घर की चारदीवारी पर स्वास्तिक का निशान बनाया गया है। बाबरी मस्जिद के बाद उन लोगों का मन बढ़ गया है। मैंने जब अब्बा से इस बारे में बात की तो वह जोर से हंसे और कहे कि ये सब लड़कों की "शैतानी है। ऐसी-वैसी कोई बात नहीं। अब तुम्हीं बताओ कि मैं चिन्ता क्यों न करूं ?’’
‘‘अब्बा तो हंसते-हंसते ये भी बताए कि जब ‘एंथ्रेक्स’ का हल्ला मचा था तब चंद स्कूली बच्चों ने चाक मिट्टी को लिफाफे में भरकर प्रिंसीपल के पास भेज दिया था। बड़ा बावेला मचा था। अब्बा हर बात को ‘नार्मल’ समझते हैं।’’Classics
- बिलौटीAnwar Suhail · 8 min read · 14.6K reads‘ठीकेदारिन कहते हैं उसे मज़दूर-रेज़ा, नेता-परेता।
ठाठ तो देखिए...ठाड़े-ठाड़े गरियाती है लेबरों, अफसरों और मउगे नेताओं को।
नेता, अफसर, ठेकेदारों के बीच उठती-बैठती और क्या जाने दारू-मुर्गा भी खींचती है।
Crime
- गौ-हत्या Anwar Suhail · 20 min read · 22.2K readsवैसे भी दुनिया भर में ये बात कायम हो चुकी है कि मुस्लिम समाज एक बंद समाज है, दकियानूस है, प्रगति और विकास विरोधी है, अतीत-जीवी, प्रतिक्रियावादी और मूढ़ समाज है. इसके पास सारी दुनिया में कोई माकूल लीडरशिप नहीं है. ये आम तौर पर असभ्य, लडाकू, बेवफा, बदमिजाज होते हैं. फिर इस मुल्क में एक कबीर आये और उन्होंने कहा—“दिन में रोज़ा रखत हैं, रात हनत हैं गाय...” तो ये बात जगजाहिर हो गई कि मुसलमान गौ-मांस का सेवन करते हैं और गौ-हत्या करने वालों के साथ कैसा भाईचारा, इन लोगों पर कैसा विश्वास. अरे ऎसी कौम है ये जिसमें सत्ता पाने के लिए भाई की ह्त्या कर दी जाती है, बादशाह बाप को कैद में डाल दिया जाता है.
जबकि सामाजिक अध्ययन बताता है कि बीफ से सिर्फ देश का मुस्लिम वर्ग ही नहीं जुड़ा है. ईसाई, दलित भी इससे जुड़े हुए हैं. प्रोटीन का सबसे स्रोत है मुल्क में बीफ लेकिन राजनितिक ध्रुवीकरण ने इस बीफ की आड़ में मुस्लिम समाज को निशाना बनाने का काम सोची-समझी स्कीम के साथ किया.Classics