StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat- हेमा मासी और हम चले पहाड़ों की ओरRitwika Chatterjee · 7 min read · 496 readsअलविदा कहा लेकिन वादा करके आए कि हम फिर से ज़रूर आएंगे।Children Stories
- नास्तिक-लघु प्रेम-कथाSanket Singh · 1 min read · 7.2K readsदोनों ने एक पंडा की दुकान पर जूते-चप्पल उतरे, हाथ धोये और पानी मिले दूध का कलश, दो फुनगी मदार, एक धतूरे का फूल और एक फल, ११ बेलपत्र लेकर मंदिर की गली में लगी लम्बी लाईन में लग गए ।Abstract
- गर्माहट -लघु प्रेम-कथाSanket Singh · 1 min read · 8.1K readsएक फाख़्ता जब उड़ा मुंडेर से, ख़ामोशी टूटी और अपने ही इतिहास से मैं बाहर आया.Abstract
- आखिरी क्या (लप्रेक)Sanket Singh · 1 min read · 7.4K readsमधुबन था तो खतरनाक, अक्सर बी. एच. यु. के प्रॉक्टर का छापा जोड़ो की तलाश में पड़ता रहता था वहाँ. पर सुकून भी है बहुत वहाँ. आधुनिक कला के कुछ नमूने पार्क में जगह-जगह लगे हुए थे. बड़े-बड़े दरख़्त और छोटी छोटी फूलदार झाड़ियाँ मिलकर छाँव और आड़ दोनों देते हैं.Others
- साथ (लप्रेक)Sanket Singh · 1 min read · 1.6K readsलप्रेक अर्थात लघु प्रेम कथा, इसका पहला साक्षात्कार मुझसे रवीश कुमार जी के फेसबुक पोस्ट और उनके ब्लॉग से हुआ, इसके पश्चात उनकी किताब ‘इश्क़ में शहर होना’ से लप्रेक पर फुर्सत में ध्यान गया.Others
- आख़िरी उधारPrince Bhan · 14 min read · 15K readsखलीफ़ा चाचा...यही नाम था जिससे पूरा मोहल्ला उन्हें जानता था। आप सब को सुनकर लगता होगा कि खलीफ़ा चाचा किसी 6½ फुट के किसी लम्बे-चौड़े पठान का नाम है, लेकिन खलीफ़ा चाचा एक दुबले-पतले मुश्किल से 5 फुट और कुछ इंच के थे, उस पर से दीयासिलाई जैसा बदन। कुल मिलकर यूँ कहिये कि चाचा खुद में ही एक बहुत बड़ा मज़ाक थे, शायद यही वजह थी कि जो भी उनसे पहली मर्तबा मिलता था उनका नाम सुनकर ज़ोरों से हँस पड़ता था।Drama
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