- क्या फर्क पड़ता हैYahya Khan Yusufzai · 10 min read · 14.3K readsछोटे दौड़ कर आया और पूछा "क्या लाऊं साब"।
जुम्मन ने पूछा "यह बता तू हिंदू है या मुसलमान, तेरा नाम क्या है"
छोटे ने दांत निकाल दिए "मैं गरीब हूं साब, और मेरा नाम छोटे है"।
मैं ने सिगरेट का सारा धुआं एकबारगी छोड़ दिया, छोटे बदस्तूर दांत निकाले खड़ा था, गुप्ता जी फिर चुप हो गए और जुम्मन फिर मेरी ओर देखकर मुस्कराने लगा। बैक ग्राउंड में मोहम्मद अज़ीज़ का गीत गूंज रहा था।Comedy

मुझे ध्यानचंद्र जी से मिलना हैSatya Prakash · 23 min read · 1.7K readsमुझे ध्यानचंद्र जी से मिलना है । मशहूर हॉकी खिलाड़ी नहीं, यह दूसरे ही ध्यानचंद्र हैं । मिलना है तो मिलना है, सो दोपहर की चिलचिलाती धूप में ही निकल पड़ा हूँ । शहर की मुख्य साफ-सुथरे सड़क से होते हुए,पसीने से लगभग नहाते हुए, तंज, सँकरी, गंदी, गलियों से होते हुए मैं आख़िर आ ही पहुँचा हूँ , ध्यानचंद्र जी के दरवाजे तक । विश्वास न हुआ कि यही उनका वास स्थान है । दरवाजे के सम्मुख आते ही मैं देखता हूँ कि पुराने लोहे दरवाजे में जंग-लग चुकी है और कई जगहों से तो वह टूट-टूट कर इतना कमजोर हो गया है कि अगर दो चार गली के कुत्ते भी ज़ोर- ज़ोर से झगड़ते हुए अचानक आ गिरें उस पर तो वह दरवाजा टूट ही जाएगा । और हर आता जाता इस घर में प्रवेश कर जाएगा । ख़ैर मैंने बाहर लगे कॉलिंग बेल का स्विच दबाया और इस आस के साथ इंतजार करने लगा कि ध्यान जी आकर दरवाजा खोलेंगे और मेरी वर्षों की उनसे मिलने की तमन्ना, तमन्ना क्या कहिए एक तरह से तपस्या ही, पूरी हो जाने वाली है । मगर स्विच दबाने के क़रीब दो मिनट बाद सुगठित शरीर वाली सामान्य कद-काठी के एक महिला निकलती हैं ।Drama