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#vivek
5 storys
जिजीविषा !
Vivek Tariyal · 8 min read · 15.3K reads
प्रमिला को देखकर कह पाना मुश्किल था कि उसके जीवन में इतनी बड़ी आँधी आई होगी, जिसके बावजूद उसके चेहरे की हँसी बरक़रार थी, ये बात अलग है कि मन का सूनापन और ज़िन्दगी की थकावट देर सबेर हँसी के छद्म आवरण को चीर कर बाहर निकल आती थी, लेकिन प्रमिला बड़े ही सधे हुए तरीके से वापस उस हँसी को अपने चेहरे पर स्थापित कर लेती थी ।
Drama
गटरबाज़
Vivek Agrawal · 2 min read · 655 reads
वह इनके घरों के बाथरूम और पखाना से नहीं आती, दिमागों से अधिक आती है।
Tragedy
पश्चाताप
Rohtash Verma ' मुसाफ़िर ' · 2 min read · 310 reads
शरत को उनकी बातें कांटे की तरह चुभ रही थी।
Tragedy
जागीरी
Vivek Agrawal · 3 min read · 537 reads
काली की जागीरी अब नब्बे के दशक में खत्म हुई।
Tragedy
डायन भोज
Vivek Agrawal · 2 min read · 556 reads
अगली सुबह मंगता की भू (बहू) के चबूतरे पर चींटियां चावल खाती दिखीं।
Tragedy